Om Sai Ram

Om Sai Ram
Sai Charno me naman

Saturday, August 21, 2010

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Title: DAY 854
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Wednesday, August 11, 2010

क्या आप के पास दो मिनिट हैं यदि हाँ तो इसे ध्यान से पढ़िए

सुधीर जिंदल  (आज़ादी का महत्व)
क्या आप के पास दो मिनिट  हैं यदि  हाँ  तो  इसे  ध्यान  से  पढ़िए 

                मैं  बात  कर रहा हूँ अपने आजाद हिंदुस्तान की उस हिंदुस्तान की जिसको आज़ादी दिलाने के लिए हमारे स्वतंत्रता संग्राम  सेनानियों ने अपनी शहादत दी २०० साल की लम्बी गुलामी के बाद हम आज़ाद हुए  पर वास्तव में क्या हम आजाद हैं ? क्या हमें  आज़ादी का महत्व समझ आता है ? क्या हम अपनी आज़ादी को पूरे सम्मान के साथ महसूस करते हैं ? कुछ बातो को छोड़ दे तो नहीं.
               हम आज भी गुलाम हैं, हम गुलाम हैं उस संस्कृति के जो अंग्रेज यहाँ छोड़ गए थे.  हम अपने आप को हिन्दुस्तानी कहने में शर्म महसूस करते है.  हमारी मातृभाषा हिंदी बोलने में हम बैकवर्ड समझे जाते है.  अंग्रेजों की भाषा इंग्लिश हमें बहुत भाती है . और देश  के लिए हमारे पास २ मिनिट का भी समय नहीं है. 
              अरे! कम से कम आज़ादी से जश्न के दिन तो हमें देश के लिए २ मिनिट का समय देना चाहिए.  बल्कि देना होगा.
                मुझे याद आता है टी. वी. का वो विज्ञापन जिसमे बारिश हो रही है और एक अपंग व्यक्ति रेडियो पर राष्ट्रगान सुन कर उसके सम्मान में खड़ा हो जाता है. उसके मन में देश के प्रति जो ज़ज्बा है वो मिसाल कायम करता है की कम से कम उसने आज़ादी का महत्व  समझा है. 

रोज़ा फिल्म के नायक की बात करें जिसके सामने हिन्दुँस्तानी झंडे को जला दिया जाता है और उसके हाथ बंधे होने के  बावजूद वो उस पर लोट कर उसे बुझाता है और उठा कर उसे सलाम करता है.
          या बात करें फिल्म चक दे इंडिया की जिसमे सेमी फाईनल जीतने के बाद फिल्म का नायक गैलरी में खड़ा है और उसकी टीम की एक खिलाड़ी वहां आकर उससे पूछती है की वो यहाँ क्या कर रहे हैं, तब नायक कहता है की "वहां मैदान में देखो आज पहली बार किसी गोरे को इंडिया का झंडा फहराते हुए देख रहा हूँ." इस एक वाक्य में नायक के मन में गोरों की गुलामी की टीस दिखाई देती है. और जब गोरा भारत का झंडा फहराता दिखता है तब एक बड़ा सुकून महसूस होता है. की हम आज आजाद हो चुके है.
                 नागपुर के सभी सिनेमा घरों में फिल्म चालू होने के पहले सभी से खड़े होने को कहा जाता है और फिर राष्ट्र गान बजाया जाता है उस समय देशभक्ति का जो ज़ज्बा हमारे मन में जगता है ऐसा लगता है की सरकार द्वारा सारे भारत के सिनेमा घरों  में इसे अनिवार्यतः लागू कर दिया जाना चाहिए. 
                आज़ादी का महत्व समझना और समझाना कब तक चलेगा. हमें हिन्दुँस्तानी होने पर गर्व होना चाहिए. मुझे गर्व है की मैं एक हिन्दुस्तानी हूँ.
आइये आज प्रण करें की १५ अगस्त के दिन हम अपने व्यस्त कार्यक्रम में से सिर्फ २ मिनिट निकालें और आजाद भारत की शान में राष्ट्र गान गाकर और अपने झंडे को सलामी देकर अपने देश को गौरवान्वित करे.  आइये मिल कर गायें -
                           जन गन मन अधिनायक जय हे
                                               भारत भाग्य विधाता
                          पंजाब,  सिंध,  गुजरात,  मराठा 
                                              द्रविड़,  उत्कल,  बंग 
                          विन्ध्य, हिमाचल, यमुना, गंगा 
                                              उछल, जलधि तरंग 
                          तव शुभ नामे जागे 
                                              तव शुभ आशिष मांगे 
                          गाहे तब जय गाथा 
                                              जन गन मंगल दायक जय हे 
                          भारत भाग्य विधाता 
                                              जय हे, जय हे,  जय हे ....
                          जय,  जय,  जय,  जय हे ...
                                       (भारत माता की जय )
(नोट - कृपया राष्ट्र गान गाते समय सावधान की मुद्रा में खड़े होकर गाये )


Friday, August 6, 2010

युवाओं की प्रतिज्ञा ४ लेन को बचने की सराहनीय है, जनमंच की भूमिका सहयोगात्मक होनी चाहिए

४ लेन के आन्दोलन को लगातार जरी रखना होगा. मैं ६ अगस्त को युवा साथियों की पहल का स्वागत करता हूँ की उन्होंने कम से कम आगे आने की प्रतिज्ञा की.
लेकिन उनके विचारों से थोडा सहमत नहीं हूँ की वे मीडिया को समझाना चाहते हैं. मेरा मानना है की आप ऐसा आन्दोलन करो की मीडिया अपने आप सच को प्रकाशित करे. यदि किसी दबाव या फायदे की वजह से मीडिया का साथ नहीं मिल पा रहा हो तो उसका बहिष्कार किया जाना चाहिए. उनकी प्रेस के सामने या ऑफिस के सामने धरना प्रदर्शन  करना चाहिए.
युवाओं की साईकिल यात्रा निकल कर लोगों को सन्देश देना बहुत अच्छी पहल है. जनमंच को इसमें पूरा सहयोग देना होगा. तभी सिवनी की जनता में सन्देश जायेगा की जन्माच कोई राजनितिक मंच नहीं बल्कि ४ लेन बचने के आन्दोलन हेतु बनाया गया मंच है जिसका केवल एक ही उद्देश्य है सिवनी की ४ लेन को बचाना. इसीलिए जनमंच हर ऐसे आन्दोलन में साथ देगा जो ४ लेन बचने के लिए किया जा रहा हो. मेरा सुझाव मैं पहले भी दे चूका हूँ और एक बार फिर देना चाहूँगा की १४ अगस्त को एक विशाल मानव श्रंखला बना कर हमें युवाओं की और जन्माच के साथ साथ पुरे सिवनी की ताकत दिखानी होगी. ये मानव श्रृंखला इतनी लम्बी और हर गली मोहल्लों में बननी चाहिए जिससे हर मीडिया का ध्यान आकर्षित हो. और वे मजबूर हो जाये ४ लेन बचने हेतु हमारी बात को दिल्ली तक पहुचने के लिए. मैं इस हेतु अपना पूरा सहयोग दूंगा और आपसे भी अपील करता हूँ की ४ लेन बचने हेतु खुलकर आगे आये ये आपकी लड़ाई है और इसे आपको ही लड़नी पड़ेगी.

Thursday, August 5, 2010

४ लेन के आन्दोलन को और तेज करना जरुरी है

३ अगस्त को हुए ४ लेन के लिए बंद और सदबुध्धि यज्ञ में जनमंच की भूमिका और सिवनी के नागरिकों का मिलाजुला प्रयास तारीफ के काबिल है. परन्तु ४ लेन के नहीं banaye जाने से जनता का क्या नुकसान है ये जनता को खुल कर समझाना जरुरी है. क्योंकि सोनी की सुस्त जनता जब तक अपने ऊपर कष्ट ना आये तब तक जगती नहीं है. जनमंच में शामिल लोगों को आपसी खिंचा तानी छोड़ कर लगातार आन्दोलन में गति लानी चाहिए. इस हेतु जनता से न्यूज़ पेपर और पोम्प्लेट के माध्यम से अपील करनी चाहिए की वे आन्दोलन में अपनी भागीदारी बरी बरी से दे. जैसे किसी दिन मानव श्रंखला बनानी चाहिए. किसी दिन हस्ताक्षर अभियान चलाना चाहए. और किसी दिन उपवास रखना चाहिए. १५ अगस्त को जनमंच के सरकारी कार्यक्रमों के बहिष्कार को स्वीकारते हुए १५ अगस्त के दिन आज़ादी को शुक्रवारी नगर पालिका के सामने कचहरी चौक में और बारापत्थर में उपवास रख कर सत्याग्रह करके प्रधान मंत्री मनमोहन सिघ एवं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल तक अपनी बात का हस्ताक्षर युक्त पत्र भेजना चाहिए.