Om Sai Ram

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Sai Charno me naman

Wednesday, August 11, 2010

क्या आप के पास दो मिनिट हैं यदि हाँ तो इसे ध्यान से पढ़िए

सुधीर जिंदल  (आज़ादी का महत्व)
क्या आप के पास दो मिनिट  हैं यदि  हाँ  तो  इसे  ध्यान  से  पढ़िए 

                मैं  बात  कर रहा हूँ अपने आजाद हिंदुस्तान की उस हिंदुस्तान की जिसको आज़ादी दिलाने के लिए हमारे स्वतंत्रता संग्राम  सेनानियों ने अपनी शहादत दी २०० साल की लम्बी गुलामी के बाद हम आज़ाद हुए  पर वास्तव में क्या हम आजाद हैं ? क्या हमें  आज़ादी का महत्व समझ आता है ? क्या हम अपनी आज़ादी को पूरे सम्मान के साथ महसूस करते हैं ? कुछ बातो को छोड़ दे तो नहीं.
               हम आज भी गुलाम हैं, हम गुलाम हैं उस संस्कृति के जो अंग्रेज यहाँ छोड़ गए थे.  हम अपने आप को हिन्दुस्तानी कहने में शर्म महसूस करते है.  हमारी मातृभाषा हिंदी बोलने में हम बैकवर्ड समझे जाते है.  अंग्रेजों की भाषा इंग्लिश हमें बहुत भाती है . और देश  के लिए हमारे पास २ मिनिट का भी समय नहीं है. 
              अरे! कम से कम आज़ादी से जश्न के दिन तो हमें देश के लिए २ मिनिट का समय देना चाहिए.  बल्कि देना होगा.
                मुझे याद आता है टी. वी. का वो विज्ञापन जिसमे बारिश हो रही है और एक अपंग व्यक्ति रेडियो पर राष्ट्रगान सुन कर उसके सम्मान में खड़ा हो जाता है. उसके मन में देश के प्रति जो ज़ज्बा है वो मिसाल कायम करता है की कम से कम उसने आज़ादी का महत्व  समझा है. 

रोज़ा फिल्म के नायक की बात करें जिसके सामने हिन्दुँस्तानी झंडे को जला दिया जाता है और उसके हाथ बंधे होने के  बावजूद वो उस पर लोट कर उसे बुझाता है और उठा कर उसे सलाम करता है.
          या बात करें फिल्म चक दे इंडिया की जिसमे सेमी फाईनल जीतने के बाद फिल्म का नायक गैलरी में खड़ा है और उसकी टीम की एक खिलाड़ी वहां आकर उससे पूछती है की वो यहाँ क्या कर रहे हैं, तब नायक कहता है की "वहां मैदान में देखो आज पहली बार किसी गोरे को इंडिया का झंडा फहराते हुए देख रहा हूँ." इस एक वाक्य में नायक के मन में गोरों की गुलामी की टीस दिखाई देती है. और जब गोरा भारत का झंडा फहराता दिखता है तब एक बड़ा सुकून महसूस होता है. की हम आज आजाद हो चुके है.
                 नागपुर के सभी सिनेमा घरों में फिल्म चालू होने के पहले सभी से खड़े होने को कहा जाता है और फिर राष्ट्र गान बजाया जाता है उस समय देशभक्ति का जो ज़ज्बा हमारे मन में जगता है ऐसा लगता है की सरकार द्वारा सारे भारत के सिनेमा घरों  में इसे अनिवार्यतः लागू कर दिया जाना चाहिए. 
                आज़ादी का महत्व समझना और समझाना कब तक चलेगा. हमें हिन्दुँस्तानी होने पर गर्व होना चाहिए. मुझे गर्व है की मैं एक हिन्दुस्तानी हूँ.
आइये आज प्रण करें की १५ अगस्त के दिन हम अपने व्यस्त कार्यक्रम में से सिर्फ २ मिनिट निकालें और आजाद भारत की शान में राष्ट्र गान गाकर और अपने झंडे को सलामी देकर अपने देश को गौरवान्वित करे.  आइये मिल कर गायें -
                           जन गन मन अधिनायक जय हे
                                               भारत भाग्य विधाता
                          पंजाब,  सिंध,  गुजरात,  मराठा 
                                              द्रविड़,  उत्कल,  बंग 
                          विन्ध्य, हिमाचल, यमुना, गंगा 
                                              उछल, जलधि तरंग 
                          तव शुभ नामे जागे 
                                              तव शुभ आशिष मांगे 
                          गाहे तब जय गाथा 
                                              जन गन मंगल दायक जय हे 
                          भारत भाग्य विधाता 
                                              जय हे, जय हे,  जय हे ....
                          जय,  जय,  जय,  जय हे ...
                                       (भारत माता की जय )
(नोट - कृपया राष्ट्र गान गाते समय सावधान की मुद्रा में खड़े होकर गाये )


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